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वैदिक ज्योतिष की 12 राशियाँ, एक-एक करके

November 15, 202510 min read

आकाश में क्रांतिवृत्त (ecliptic) को बारह बराबर हिस्सों में बांटा गया है, हर हिस्सा ३० अंश का — इसी को राशिचक्र कहा जाता है। वैदिक ज्योतिष में इन बारह राशियों का सीधा असर किसी व्यक्ति के स्वभाव, आचरण और जीवन की दिशा पर पड़ता है।

चार तत्वों का वर्गीकरण

ज्योतिषी बारह राशियों को चार तत्व-परिवारों में बांटते हैं — अग्नि, पृथ्वी, वायु और जल। किसी राशि का तत्व जान लेने भर से उसके मूल स्वभाव का अंदाज़ा आसानी से लग जाता है।

  • अग्नि तत्व: मेष, सिंह, धनु (साहसी, तेज़तर्रार और कर्म-प्रधान)
  • पृथ्वी तत्व: वृष, कन्या, मकर (यथार्थवादी, टिकाऊ स्वभाव और विश्वसनीय)
  • वायु तत्व: मिथुन, तुला, कुंभ (तर्कशील, बातूनी और सामाजिक रूप से सक्रिय)
  • जल तत्व: कर्क, वृश्चिक, मीन (भावुक, सहज-ज्ञानी और संवेदनशील मन के)

सभी बारह राशियों का परिचय

१. मेष (Aries)

तिथियां: १४ अप्रैल - १४ मई (वैदिक)

राशिचक्र की शुरुआत करने वाली मेष राशि अपने जोशीले तेवर, नेतृत्व क्षमता और निडरता के लिए पहचानी जाती है। इसका स्वामी मंगल है, और इस राशि में जन्मे लोग अक्सर नई राह बनाने वाले और पहल करने में आगे रहते हैं।

२. वृष (Taurus)

तिथियां: १५ मई - १४ जून (वैदिक)

वृष राशि पर शुक्र का शासन है, इसलिए इसे स्थायित्व, सुंदरता और आराम भाते हैं। इसके जातक भरोसे लायक, धैर्यशील और व्यावहारिक सोच वाले होते हैं, हालांकि जिद इनके स्वभाव में कभी-कभार झलक ही जाती है।

३. मिथुन (Gemini)

तिथियां: १५ जून - १६ जुलाई (वैदिक)

बुध के आधिपत्य वाली यह वायु राशि है, और मिथुन के जातक हालात के साथ जल्दी ढल जाते हैं, जिज्ञासु रहते हैं और बातचीत में माहिर होते हैं। इनके प्रतीक में दोहरापन झलकता है, और यही वजह है कि ये अलग-अलग नज़रिए टटोलना पसंद करते हैं।

४. कर्क (Cancer)

तिथियां: १७ जुलाई - १६ अगस्त (वैदिक)

चंद्रमा इस राशि का स्वामी है, और कर्क को राशिचक्र की सबसे ममतामयी राशि कहा जा सकता है। इसके जातक गहराई से भावुक, सहज-प्रवृत्ति वाले होते हैं और अपने परिवार व घर की रक्षा करने में पीछे नहीं हटते।

५. सिंह (Leo)

तिथियां: १७ अगस्त - १६ सितंबर (वैदिक)

सूर्य के शासन वाली सिंह राशि के लोग जन्मजात नेता होते हैं और उनके व्यक्तित्व में एक राजसी ठसक दिखती है। ये आत्मविश्वासी, दिलदार और रचनात्मक स्वभाव के होते हैं, साथ ही सम्मान व पहचान पाने की चाहत भी रखते हैं।

६. कन्या (Virgo)

तिथियां: १७ सितंबर - १७ अक्टूबर (वैदिक)

बुध यहां भी शासक ग्रह है, और कन्या राशि तार्किक सोच, बारीक नज़र और सेवा-भावना के लिए जानी जाती है। पूर्णता की चाह इनके स्वभाव में रहती है, साथ ही अपनी सेहत को लेकर भी ये काफी सतर्क रहते हैं।

७. तुला (Libra)

तिथियां: १८ अक्टूबर - १६ नवंबर (वैदिक)

शुक्र के प्रभाव वाली तुला राशि संतुलन, मेलजोल और साझेदारियों की तलाश में रहती है। इसके जातक कूटनीतिक ढंग से बात करते हैं, आकर्षक स्वभाव रखते हैं, और हर रिश्ते में निष्पक्षता को अहमियत देते हैं।

८. वृश्चिक (Scorpio)

तिथियां: १७ नवंबर - १५ दिसंबर (वैदिक)

पारंपरिक रूप से मंगल इस राशि पर शासन करता है, और वृश्चिक के जातक तीव्र भावनाओं, गहरे जुनून और थोड़े रहस्यमय स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। रूपांतरण, रहस्य और भावनात्मक गहराई इस राशि की पहचान है।

९. धनु (Sagittarius)

तिथियां: १६ दिसंबर - १४ जनवरी (वैदिक)

बृहस्पति के आधिपत्य वाली धनु राशि ज्ञान, दार्शनिक सोच और सकारात्मकता की प्रतीक है। इसके जातक साहसिक प्रवृत्ति के होते हैं और इन्हें आज़ादी तथा गहन अध्ययन की ओर स्वाभाविक खिंचाव रहता है।

१०. मकर (Capricorn)

तिथियां: १५ जनवरी - १२ फरवरी (वैदिक)

शनि के शासन वाली मकर राशि महत्वाकांक्षा, अनुशासन और परिश्रम से भरपूर होती है। करियर बनाना, प्रतिष्ठा अर्जित करना और लंबे समय के लक्ष्यों तक पहुंचना इनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर रहता है।

११. कुंभ (Aquarius)

तिथियां: १३ फरवरी - १४ मार्च (वैदिक)

शनि और राहु दोनों इस राशि से जुड़े हैं, और कुंभ राशि नए विचारों, मानव-कल्याण की सोच और थोड़े अलग-हटकर स्वभाव के लिए जानी जाती है। अपनी अलग पहचान बनाए रखना इनके लिए जरूरी होता है, और जीवन को देखने का इनका नजरिया भी अक्सर बाकियों से हटकर होता है।

१२. मीन (Pisces)

तिथियां: १५ मार्च - १३ अप्रैल (वैदिक)

बृहस्पति इस अंतिम राशि का स्वामी है, जो आध्यात्मिकता, करुणा और कल्पनाशीलता का प्रतीक मानी जाती है। इसके जातक सपनों की दुनिया में रहने वाले, कलाप्रेमी और गहरी संवेदनशीलता रखने वाले होते हैं।

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The 12 Rashis of Vedic Astrology, One by One