दिवाली 2026 राशि अनुसार उपाय: सभी 12 राशियों के लिए
दिवाली लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। मुख्य गणेश-लक्ष्मी पूजा के साथ कई परिवार अपनी राशि और उसके स्वामी ग्रह से जुड़ा एक छोटा उपाय भी करते हैं। यहां सभी 12 राशियों के लिए अर्पण, रंग, दान और मंत्र दिए गए हैं, जो प्रतिष्ठित पंचांगों और प्रकाशनों में बार-बार मिलने वाले उपायों पर आधारित हैं।
दिवाली 2026 तिथि और मुहूर्त
- दिवाली (लक्ष्मी पूजा)
- रविवार, 8 नवंबर 2026
- अमावस्या तिथि आरंभ
- सुबह 11:27, 8 नवंबर
- अमावस्या तिथि समाप्त
- दोपहर 12:31, 9 नवंबर
- प्रदोष काल
- शाम 5:31 से रात 8:09
- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
- शाम 5:54 से 7:50
समय नई दिल्ली (IST) के लिए हैं, जैसा द्रिक पंचांग ने प्रकाशित किया है। मुहूर्त प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न का मेल है, इसलिए यह आपके शहर के सूर्यास्त के साथ बदलता है।
उपाय राशि के अनुसार क्यों
हर राशि का एक स्वामी ग्रह होता है, और हर ग्रह के अपने रंग, खाद्य पदार्थ और वस्तुएं होती हैं। मंगल को लाल, शुक्र को सफेद और सुगंध, बुध को हरा, चंद्रमा को दूध और सफेद फूल, सूर्य को घी और प्रकाश, गुरु को पीला और शनि को तेल और तिल प्रिय हैं। राशि अनुसार उपाय आपकी लक्ष्मी पूजा को आपकी राशि के स्वामी ग्रह से जोड़ते हैं।
लक्ष्मी जी का शुक्र ग्रह से गहरा संबंध माना जाता है। दिवाली पर सूर्य शुक्र की राशि तुला में होता है, और पूजा वृषभ लग्न में की जाती है, जो शुक्र की दूसरी राशि है। इसीलिए दिवाली के अर्पण में सफेद मिठाई, कमल, चांदी और सुगंध इतनी बार आते हैं।
वैदिक ज्योतिष में आपकी राशि आपकी चंद्र राशि होती है, जो अक्सर पश्चिमी सूर्य राशि से अलग होती है। अपनी राशि नहीं पता? हमारे चंद्र राशि कैलकुलेटर में अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान डालें।
हर राशि के लिए दिवाली उपाय
पहले मुहूर्त में मुख्य गणेश-लक्ष्मी पूजा करें। फिर अपनी राशि का अर्पण जोड़ें, और चाहें तो राशि स्वामी के मंत्र का जाप करें। पूजा में बताए गए रंग के वस्त्र पहनें, और दान उसी शाम या अगली सुबह करें।
मेष
स्वामी: मंगललक्ष्मी जी को लाल फूल (गुलाब या गुड़हल), लाल चंदन और थोड़ा केसर अर्पित करें, और गुड़ का भोग लगाएं। मुख्य द्वार पर 11 दीये जलाएं।
- रंग
- लाल
- दान
- लाल मिठाई या चीनी
- मंत्र
- ॐ अं अंगारकाय नमः
वृषभ
स्वामी: शुक्रकमल का फूल अर्पित करें या कमलगट्टे की माला से जाप करें, और खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाएं। पूजा में चांदी का सिक्का रखें और बाद में उसे तिजोरी में रख दें।
- रंग
- सफेद
- दान
- हरी मूंग दाल
- मंत्र
- ॐ शुं शुक्राय नमः
मिथुन
स्वामी: बुधलक्ष्मी जी को पान और हरी मिठाई अर्पित करें, और गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं। तुलसी के पास एक दीया जलाएं।
- रंग
- हरा
- दान
- हरी मूंग दाल
- मंत्र
- ॐ बुं बुधाय नमः
कर्क
स्वामी: चंद्रसफेद फूल, हो सके तो सफेद कमल, और दूध-चावल की खीर या कोई सफेद मिठाई अर्पित करें। यदि चांदी का दीया हो तो उसे जलाना इस राशि के लिए उत्तम है।
- रंग
- सफेद या क्रीम
- दान
- चावल या दूध की मिठाई
- मंत्र
- ॐ सों सोमाय नमः
सिंह
स्वामी: सूर्यमुख्य द्वार पर शुद्ध घी का दीया जलाएं और उसे पूरी रात जलने दें। गेहूं और गुड़ से बनी मिठाई या लड्डू का भोग लगाएं।
- रंग
- सुनहरा या पीला
- दान
- वस्त्र या मिठाई
- मंत्र
- ॐ घृणि सूर्याय नमः
कन्या
स्वामी: बुधलक्ष्मी जी के साथ श्री यंत्र की पूजा करें, और मूंग दाल की मिठाई, हरी मिठाई या पान अर्पित करें। लक्ष्मी सहस्रनाम का पाठ भी शुभ माना गया है।
- रंग
- हरा
- दान
- विद्यार्थियों को किताबें या स्टेशनरी
- मंत्र
- ॐ बुं बुधाय नमः
तुला
स्वामी: शुक्रलक्ष्मी जी को इत्र या गुलाब जल अर्पित करें और मिश्री का भोग लगाएं। कुछ परंपराओं में सफेद रेशमी वस्त्र भी चढ़ाया जाता है।
- रंग
- सफेद या गुलाबी
- दान
- किताबें या पठन सामग्री
- मंत्र
- ॐ शुं शुक्राय नमः
वृश्चिक
स्वामी: मंगललाल गुड़हल अर्पित करें और गुड़-चने या बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं।
- रंग
- लाल या मैरून
- दान
- गुड़ के साथ चने की दाल
- मंत्र
- ॐ अं अंगारकाय नमः
धनु
स्वामी: गुरु (बृहस्पति)पीली वस्तुएं अर्पित करें: बेसन के लड्डू, हल्दी और केसर। पान के पत्ते पर रोली से 'श्री' लिखकर लक्ष्मी जी के सामने रखें।
- रंग
- पीला
- दान
- पीला वस्त्र या ज़रूरतमंदों को भोजन
- मंत्र
- ॐ बृं बृहस्पतये नमः
मकर
स्वामी: शनिशाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों या तिल के तेल का दीया जलाएं। पूजा के बाद एक श्रीफल (नारियल) लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रखें।
- रंग
- गहरा नीला
- दान
- साबुत धनिया या काले तिल
- मंत्र
- ॐ शं शनैश्चराय नमः
कुंभ
स्वामी: शनिलक्ष्मी पूजा के साथ शनि देव का भी स्मरण करें। खीर और गुड़ या गन्ने का भोग लगाएं।
- रंग
- नीला
- दान
- उड़द की दाल
- मंत्र
- ॐ शं शनैश्चराय नमः
मीन
स्वामी: गुरु (बृहस्पति)शहद, पीले फूल, हल्दी और केसर अर्पित करें। इस राशि के लिए शहद मिला दूध चढ़ाना भी प्रचलित है।
- रंग
- पीला
- दान
- कंबल या भूखों को भोजन
- मंत्र
- ॐ बृं बृहस्पतये नमः
सभी राशियों के लिए उपाय
दिवाली की रात के ये पारंपरिक उपाय सभी के लिए हैं, चाहे आपकी राशि कोई भी हो:
- मुख्य द्वार को साफ करके रोशन करें। प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक बनाएं और 'शुभ लाभ' लिखें, आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं, और दरवाज़े के दोनों ओर एक-एक दीया रखें।
- लक्ष्मी जी को कमल के फूल या कमलगट्टे अर्पित करें, और पूजा में श्री सूक्त का पाठ करें।
- गणेश जी को हल्दी की दो गांठें चढ़ाएं। पूजा के बाद उन्हें पीले कपड़े में बांधकर धन रखने के स्थान पर रख दें।
- चांदी का सिक्का रात भर गंगाजल में रखें, फिर अगली सुबह वह जल पूरे घर और दरवाज़े पर छिड़कें।
- दिवाली के दिन पैसे उधार देने या लेने से बचें, और पूजा में काले वस्त्र न पहनें।
महालक्ष्मी मंत्र
आपकी राशि कोई भी हो, यह वह लक्ष्मी मंत्र है जिसे द्रिक पंचांग सबसे अधिक जपा जाने वाला बताता है। इसे पूजा में राशि स्वामी के मंत्र के स्थान पर या उसके साथ जपा जा सकता है।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में दिवाली लक्ष्मी पूजा कब है?
दिवाली लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। अमावस्या तिथि 8 नवंबर सुबह 11:27 से 9 नवंबर दोपहर 12:31 तक है, और नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 तक है। समय आपके शहर के सूर्यास्त के अनुसार बदलता है।
मुझे अपनी चंद्र राशि देखनी चाहिए या सूर्य राशि?
वैदिक ज्योतिष में आपकी राशि आपकी चंद्र राशि होती है, यानी जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। यह अक्सर पत्रिकाओं में दिखने वाली पश्चिमी सूर्य राशि से अलग होती है, इसलिए पहले अपनी चंद्र राशि जान लें।
क्या ये उपाय सामान्य लक्ष्मी पूजा का विकल्प हैं?
नहीं। ये सामान्य गणेश-लक्ष्मी पूजा में जोड़े जाने वाले छोटे उपाय हैं, जो उसी मुहूर्त में किए जाते हैं। पहले मुख्य पूजा करें, फिर अपनी राशि का अर्पण और मंत्र जोड़ें।
अलग-अलग वेबसाइटें एक ही राशि के लिए अलग उपाय क्यों बताती हैं?
राशि अनुसार उपाय पारंपरिक मान्यताएं हैं, और अलग-अलग परिवार, क्षेत्र और ज्योतिषी इनके भिन्न रूप मानते हैं। इस लेख में वे अर्पण दिए गए हैं जो कई प्रतिष्ठित स्रोतों में मिलते हैं और हर राशि के स्वामी ग्रह से मेल खाते हैं।
मंत्र का जाप कितनी बार करना चाहिए?
इसका कोई एक तय नियम नहीं है। कई परिवार प्रदोष काल में माला का एक चक्र, यानी 108 बार, जाप करते हैं, जबकि कुछ 11 या 21 बार। संख्या से अधिक महत्व एकाग्र मन का है।
केवल चंद्र राशि नहीं, पूरी जन्म कुंडली के आधार पर उपाय जानने के लिए अपनी निःशुल्क कुंडली बनाएं या हमारे AI ज्योतिषी से पूछें।
अस्वीकरण: राशि अनुसार उपाय पारंपरिक मान्यताएं हैं और परिवार, क्षेत्र और ज्योतिषी के अनुसार अलग हो सकते हैं। ये सामान्य जानकारी के लिए हैं और स्वास्थ्य, धन या कानूनी मामलों में पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं हैं। मुहूर्त का समय नई दिल्ली के लिए है; कृपया अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
